दलित साहित्य

Ye Dalito Ki Basti - ये दलितों की बस्ती है

Product details

लेखक : अशोक दास 
कुल पृष्ठ : 102
वजन : 130 ग्राम
भाषा : हिंदी 
साइज :लंबाई 21 चौड़ाई 14 ऊंचाई 1 CM
प्रकाशन : दास पब्लिकेशन 

'ये दलितों की बस्ती है' नाम की यह किताब मशहूर दलित लेखक सूरजपाल चौहान की दमदार कविताओं का कलेक्शन है। अशोक दास द्वारा एडिट की गई इस किताब में 'धाकड़ कवि की धाकड़ कविताएं' हैं, जो कवि की दमदार आवाज़ को दिखाती हैं। सूरजपाल चौहान (1955-2021) दलित समुदाय के एक अहम साहित्यकार थे, जिन्हें कविता और छोटी कहानियों दोनों में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उनकी रचनाएँ बड़े पैमाने पर पब्लिश हुईं, इंग्लिश, मराठी, गुजराती, पंजाबी और उर्दू जैसी कई भाषाओं में ट्रांसलेट हुईं, और वे आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे नेशनल प्लेटफॉर्म पर रेगुलर परफॉर्म करते थे। उन्हें कई अवॉर्ड मिले, जिसमें प्रेसिडेंट प्रतिभा पाटिल से मिला 'सुब्रह्मण्यम भारती' अवॉर्ड भी शामिल है। यह कलेक्शन उनके काव्य के नज़रिए से दलित अनुभवों की जानकारी देता है। इस किताब में दिलचस्पी रखने वाले रीडर्स को सूरजपाल चौहान की दूसरी रचनाएँ भी पसंद आ सकती हैं, जैसे उनके कविता कलेक्शन 'प्रयास' या 'कब होगी वह भोर', उनके कहानी कलेक्शन 'हैरी कब आएगा' या 'नया ब्राह्मण', या उनकी ऑटोबायोग्राफी 'तिरस्कृत और संतप्त'। इसके अलावा, दलित साहित्य, सामाजिक न्याय, या आज की हिंदी कविता पर किताबें भी पढ़ने लायक हो सकती हैं।

 

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