बहुजन लीडर साहित्य

Jotirao Phule ka Samajik Darshan - जोतिराव फुले का सामाजिक दर्शन

Product details

रचनाकार : डॉ. सरोज आगलावे
अनुवाद : मीना काम्बले
कुल पृष्ठ : 200
वजन : 260 ग्राम
बाइंडिंग : पेपरबैक
भाषा : हिंदी 
साइज : लंबाई 21.5 चौड़ाई 14 ऊंचाई 1.5 CM 
प्रकाशन : सम्यक प्रकाशन

डॉ. सरोज आगलावे द्वारा लिखित पुस्तक 'जोतिराव फुले का सामाजिक दर्शन' को सम्यक प्रकाशन द्वारा हिंदी भाषा में प्रकाशित किया गया है। जाति व्यवस्था का विरोध: महात्मा जोतिराव फुले ने भारतीय समाज में व्याप्त असमानता, छुआछूत और वर्ण-जाति व्यवस्था की कड़ी आलोचना की। स्त्री शिक्षा और अधिकार: उन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों की शिक्षा पर जोर दिया तथा अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर महिलाओं के लिए पहले स्कूलों की शुरुआत की। सत्यशोधक समाज: समाज के शोषित वर्गों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए उन्होंने वर्ष 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की। किसान और मजदूर: उन्होंने अपनी रचनाओं (जैसे 'शेतकर्याचा आसूड') के माध्यम से किसानों और मजदूरों के आर्थिक शोषण को प्रमुखता से उठाया।

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