Dharm Ke Naam Par - धर्म के नाम पर

लेखक  : कर्नल रॉबर्ट ग्रीन इंगरसोल
अनुवाद : डॉ. भदंत आनंद कोसल्यायन
कुल पृष्ठ : 159
वजन : 210 ग्राम
भाषा : हिंदी 
साइज : लंबाई 21 चौड़ाई 14 ऊंचाई 1 CM 
प्रकाशन : सम्यक प्रकाशन

'इन द नेम ऑफ़ रिलीजन' (धर्म के नाम पर) नाम की यह किताब कर्नल रॉबर्ट ग्रीन इंगरसोल ने लिखी है और इसका अनुवाद डॉ. भदंत आनंद कौसल्यायन ने किया है। इसके कवर पर बनी फांसी की रस्सी और खून के छींटे साफ़ संकेत देते हैं कि इसमें धार्मिक विषयों की आलोचनात्मक और शायद विवादास्पद पड़ताल की गई है। किताब की विषय-सूची (टेबल ऑफ़ कंटेंट्स) भी इसकी पुष्टि करती है, जिसमें 'धार्मिक कट्टरता', 'गलत मान्यताओं की जड़ें कैसे हिल गईं', 'अमरता', और 'पुनर्जन्म, महिलाओं और बच्चों की आज़ादी' जैसे विषयों पर अध्याय शामिल हैं। यह किताब धार्मिक मान्यताओं और समाज पर उनके असर की तर्कवादी या मानवतावादी आलोचना लगती है, खासकर सामाजिक मुद्दों और व्यक्तिगत आज़ादी के संदर्भ में। जो पाठक इस किताब में रुचि रखते हैं, उन्हें रिचर्ड डॉकिन्स, क्रिस्टोफर हिचेंस या अन्य प्रमुख भारतीय तर्कवादी विचारकों की नास्तिकता, मानवतावाद, समाज सुधार या धर्म के आलोचनात्मक विश्लेषण पर लिखी किताबें भी पसंद आ सकती हैं।

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