Dhammpad Gatha Aur Katha - धम्मपद गाथा और कथा

रचनाकार : ताराराम
कुल पृष्ठ : 692
वजन : 1500 ग्राम
बाइंडिंग : हार्ड कवर
भाषा : हिंदी 
साइज : लंबाई 25 चौड़ाई 19 ऊंचाई 5.5 CM 
प्रकाशन : सम्यक प्रकाशन

धम्मपद बौद्ध धर्म का अत्यंत लोकप्रिय और महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें भगवान बुद्ध के 423 नैतिक और आध्यात्मिक उपदेशों को संकलित किया गया है, जो 26 वर्गों (वग्गों) में विभाजित हैं। प्रत्येक गाथा को बुद्ध ने अपने जीवनकाल में किसी विशेष घटना या समस्या के समाधान के रूप में कहा था।

गाथा और कथा का अर्थ
धम्मपद में दो मुख्य भाग होते हैं:

गाथा : ये बुद्ध द्वारा कहे गए सत्य के वचन या श्लोक होते हैं।

कथा (अट्ठकथा): ये वे ऐतिहासिक घटनाएँ या कहानियाँ होती हैं, जिनके कारण बुद्ध ने वह विशेष गाथा सुनाई थी। कहानियाँ गाथा के प्रसंग को स्पष्ट करती हैं।

प्रमुख वर्ग (वग्ग)
धम्मपद के प्रमुख वर्गों में शामिल हैं:
यमक वग्ग: इसमें मन की प्रधानता और कर्म के सिद्धांतों (जैसे- मन के अनुसार सुख-दुख का आना) को समझाया गया है।
अप्पमाद वग्ग: इसमें प्रमाद (आलस्य) को मृत्यु का मार्ग और अप्रमाद (जागरूकता) को अमृत का मार्ग बताया गया है।
 चित्त वग्ग: यह मन को वश में करने और संयमित रखने का उपदेश देता है। 
 
धम्मपद का महत्व
धम्मपद का अध्ययन मनुष्य को नैतिक जीवन, करुणा, अहिंसा और मानसिक शांति की ओर ले जाता है। इसे बौद्ध धर्म की आचार संहिता माना जा सकता है।
इन प्रेरणादायक गाथाओं और उनके पीछे की कहानियों को विस्तार से जानने के लिए, आप निम्न माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं
 
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