ऐतिहासिक साहित्य

Bhasha, Sahitya Aur Itihas Ka Punarpath - भाषा, साहित्य और इतिहास का पुनर्पाठ

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'भाषा, साहित्य और इतिहास का पुनर्पाठ' (Language, Literature, and Re-reading History) शीर्षक वाली यह किताब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर भाषाविद् डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह ने लिखी है और इसे सम्यक प्रकाशन, नई दिल्ली ने प्रकाशित किया है। इसकी विषय-सूची से पता चलता है कि इसमें चार मुख्य हिस्सों - भाषा, साहित्य, इतिहास और चिंतन - पर व्यवस्थित ढंग से चर्चा की गई है। इससे इन आपस में जुड़े विषयों का एक विस्तृत अकादमिक या आलोचनात्मक विश्लेषण होने का संकेत मिलता है; लेखक की पृष्ठभूमि और प्रकाशक को देखते हुए इसमें भारतीय संदर्भ पर खास ध्यान दिया गया होगा। यह किताब भाषा-विज्ञान, साहित्य-आलोचना, ऐतिहासिक अध्ययन और दार्शनिक चिंतन में रुचि रखने वाले विद्वानों, छात्रों और उत्साही लोगों के लिए तैयार की गई है। इससे मिलती-जुलती अन्य किताबों में भारतीय भाषाओं, साहित्य, इतिहास और दर्शन पर अन्य अकादमिक रचनाएँ, साथ ही डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह या सम्यक प्रकाशन की अन्य प्रकाशित कृतियाँ शामिल हो सकती हैं।

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